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Hyderabad, Telangana, India

Thursday, June 14, 2012

जी हां, ये मुलायम और ममता का कांग्रेस से ‘बदला’ ही है।

ममता और मुलायम का मात से कांग्रेस की पीढ़ा समझ में आती है......जिस तरीके से दोनों ही नेताओं ने राष्ट्रपति पद पर कांग्रेस और सोनिया की पसंद प्रणब मुखर्जी को खारिज करते हुए इस पद के लिए खुद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का नाम आगे किया उससे खुद कांग्रेस अंभित है। ममता और मुलायम के इस दाव से सियासी गलियारों में गैर कांग्रेसी खेमें में एक अनोखा संतोष है......चाहें वो मौजूदा सरकार में कांग्रेस का सहयोगी हो या फिर कोई पुराना सहयोगी। दरअसल कांग्रेस जिस तरह की सियासत करती है और खास तौर से अपने सहयोगियों के साथ वैसे में उसते साथ इस तरह का व्यवहार काफी मौजू है.......मौजूदा सियासी सूरते हाल में कांग्रेस की फितरत इस तरह की बन गयी है कि वो अपने सहयोगियों और मददगारों को भी नुकसान पहुटाने से बाज नही आती। खुद गठबंधन धर्म की मर्यादा की बात करने वाली सबसे पुरानी पार्टी ने अहम मसलों पर दूसरे दलों से लाभ लेने के बाद जिस तरीके से उनके बुरे वक्त मैं दगा देने का इतिहास कायम किया है....उसमें इस दल का की सानी नही......चाहें न्यूक्लियर डील पर मदद करने वाले मुलायम को धोखा देने की बात हो या फिर लालू के तमाम सहयोग के बावजूद उनके बुरे वक्त में अकेले छोड़ने का मामला......चाहें लेफ्ट को लूटने की कहानी हो या फिर अपने ही सहयोगी एनसीपी को हड़पने की साजिश। इकलौती ममता ही ऐसी नेता है जिसने कांग्रेस को वक्त दर वक्त सही सबक सिखाया है और कांग्रेसी दाव से ही कांग्रेसियों धरासाई करती रही हैं। ममता का पुराना कांग3एसी होना इस खासियत की वज़ह हो सकती है। मुलायम और ममता के इस सियासी सबक को कांग्रेस के मौजूदा रणनीतिकार समझ ले तो तो बेहतर होगा।

Tuesday, June 12, 2012

बीजेपी में नया संकट

देश की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी बीजेपी इस समय भारी अंतरकलह से जूझ रही है। गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी से कथित मतभेद की वजह से हाल में सुर्खियों में आए बीजेपी के नेता संजय जोशी ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है जिसे पार्टी अध्यक्ष नीतीन गडकरी ने स्वीकार भी कर लिया बीजेपी  इस मसले पर अपनी झेप मिटाते हुए कह रही है कि संजय जोशी ने पार्टी से कार्यमुक्त किए जाने का अनुरोध किया था जिसे बीजेपी अध्यक्ष ने स्वीकार कर लिया है। इससे पहले नरेंद्र मोदी से विरोध के कारण राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के करीबी माने जाने वाले संजय जोशी को पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी से भी इस्तीफा देना पड़ा था। गुजरात के मुख्यमंत्री और पार्टी के वरिष्ठ नेता नरेंद्र मोदी और संजय जोशी के बीच तीखे मतभेद जगजैहिर है। हालांकि बीजेपी दोनों में किसी तरह के मतभेद की बातों से इनकार करती रही है। पिछले दिनों मुंबई में हुई बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में नरेंद्र मोदी ने पार्टी आलाकमान पर ये शर्त लाद दिया था कि अगर संजय जोशी कार्यकारिणी में बने रहेंगे तो गुजरात से कार्यकारिणी के सदस्य इस्तिफा दे देंगे। पार्टी को किसी तरह के कलह, विवाद और हास्यास्पद स्थिति से बचाने के लिए पार्टी आलाकमान को आखिर मोदी के शर्तों के आगे झुकना पड़ा और संजय जोशी को कार्यकारिणी के ठीक पहले इस्तिफा देना पड़ा। इस निर्णय पर आरएसएस की रजामंदी बताई जाती है। इसके बाद ही नरेन्द्र मोदी ने कार्यकारिणी की बैठक में शिरकत की थी। किसी जमाने में संघ की पृष्ठभूमि से आए संजय जोशी का रसूख और रुतबा बीजेपी में काफी अहमियत रखता था....लेकिन चर्चित सीडी काण्ड और मोदी विरोध के चलते जोशी हाशिये पर डाल दिये गये थे। नीतिन गदडकरी के पार्टी अध्यक्ष बनने के एक अरसे बाद संजय जोशी की पार्टी में वापसी भी हुई और यूपी चुनावो में तो उन्हें पार्टी की तरफ से अहम जिम्मेदारी भी सौपी गयी......इसके बाद ही मोदी पार्टी आलाकमान खासे नाराज चल रहें थे। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम के बाद पार्टी के भीतर जबरदस्त खेमेबंदी शुरु हो गयी है। पार्टी के अंदर एक धड़ा नीतिन गडकरी और संजय जोशी के पक्ष में खड़ा नज़र रहा है....वहीं दूसरी तरफ ऐसे लोग भी है जो मोदी के हक में बाते कर रहें है। उधर बीजेपी के वरिष्ठ नेता और बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने इसे गलत बताते हे कहा कि कोई व्यक्ति इस तरीके से पार्टी को हाईजैक नही कर सकता।

तेलंगाना: बीजेपी के कब्जे वाली इकलौती लोकसभा सीट भी जा सकती है हाथ से

BJP MP Bandaru Dattatreya आंध्रप्रदेश से अलग होने के बाद वर्तमान में तेलंगाना के पास लोकसभा की 17 और विधान सभा की 119 सीटें रह गयी ह...