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Monday, March 25, 2019

तेलंगाना: बीजेपी के कब्जे वाली इकलौती लोकसभा सीट भी जा सकती है हाथ से

BJP MP Bandaru Dattatreya
आंध्रप्रदेश से अलग होने के बाद वर्तमान में तेलंगाना के पास लोकसभा की 17 और विधान सभा की 119 सीटें रह गयी है। 2014 के लोकसभा चुनावों में मोदी लहर के बावजूद आए प्रचंड़ बहुमत में भी बीजेपी को तेलंगाना से लोकसभा में महज 1 ही सीट हासिल हुई थी। विधानसभा चुनाव उस वक्त साथ ही हुए थे और उसमें बीजेपी को 5 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा था। तेलंगाना बीजेपी से चौथी बार एकमात्र सांसद बने बंडारू दत्तात्रेय को कंद्रीय मंत्री के रुप में जगह मिली थी, लेकिन बाद में उन्हें भी फेरबदल में मंत्री पद गवाना पड़ा। मौजूदा समय में केंद्र सरकार में तेंलंगाना का कोई प्रतिनिधित्व दिखाई नही देता।
Bandaru Dattatreya , BJP (Left) & Anjan Kumar Yadev (Congress)

बीजेपी के कब्जे वाली जिस इकलौती लोकसभा सीट की हम बात कर रहें है वो है सिकंदराबाद लोकसभा सीट। इस लोकसभा क्षेत्र की ज़द में सात विधानसभा की सीटें शुमार होती हैं। अभी तक इस सीट पर सीधी टक्कर कांग्रेस और बीजेपी के बीच होती रही है। वक्त से पहले ही विधानसभा भंग कर दिसम्बर 18 के एसेंबली चुनावों में इन 7 सीटों मे से 6 पर सत्ताधारी टीआरएस ने जीत का परचम लहराया। 1 सीट पर AIMIM ने जीत दर्ज की, यानि एक तरह से कह सकते है कि पूरे पर सत्ताधारी दल का कब्जा (क्योंकि AIMIM टीआरएस के साथ है।) अगर पूरे राज्य की बात करें तो टीआरएस ने 119 में से 89 सीटें जीत कर प्रचंड़ बहुमत के साथ वापसी की थी। जहां असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM ने 7 सीटें जीतकर अपना पुराना रिकार्ड बरकरार रखा वहीं बीजेपी 5 से सिमट कर एक सीट पर आ गयी। कांग्रेस भी 20 सीटों से सिमटकर 19 हो गयी है। ये महज़ तीन महिनें पहले की बात है। रोचक बात ये कि इसी महिनें हुए विधान परिषद चुनावों के दौरान कांग्रेस के 19 विधायकों में से 6 सीएम केसीआर से मिलकर टीआएएस में शामिल होने का एलान कर चुके हैं, और कुछ कतार में है। यहां आपको ये भी बताते चले कि इन 5 सीटों में से 4 टीआरएस और एक AIMIM नें जीतीं है।

हम लौटते है अपने विषय सिंदराबाद लोकसभा सीट पर, महज़ कुछ महिने पहले हुए विधानसभा चुनावों और इसी महिने हुए विधानपरिषद चुनाव के परिणाम लोकसभा के भावी चुनावी परिणामों की तरफ खुद ब खुद इशारा कर रहें हैं। सिकंदाराबाद लोकसभा की 7 विधानसभा सीटों में से 6 पर टीआरएस का ताजा ताजा कब्जा स्पष्ट तौर पर टीआरएस के हक़ में इशारा करता है। सूबे में बीजेपी और कांग्रेस की लगातार कमजोर होती स्थिति भी इस बात पर मुहर लगाती है कि टीआरएस का टेम्पो हाई है। एक और महत्पू्र्ण बात, AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी अपनी कई जनसभाओं से बीजेपी को ये खुली चुनौती दे चुके कि इकलौती सिकंदराबाद सीट भी बीजेपी से इस बार छीन ली जाएगी। बंडारू दत्तात्रेय को केंद्रीय मंत्री पद से हटाये जाने के बाद, विरोधी दल तेलंगाना के इकलौते प्रतिनिधित्व के अपमान का मुद्दा उठा सकते हैं। OBC  बाहुल्य वाले इस लोकसभा क्षेत्र में एक बयोवृद्ध OBC नेता का टिकट काटना भी बीजेपी को अंदर और बाहर दोनों तरह से नुकसान पहुंचा सकता है।
Bandaru Dattatreya (left) & Kishan Reddy, BJP (Right)

दूसरी तरफ, इस सकारात्मक माहौल के बावजूद टीआरएस के लिेए ये जीत आसान नही होगी। भले ही बीजेपी ने अपने मौजूदा सांसद बंडारू दत्तात्रेय का टिकट काट दिया है, लेकिन पूर्व तेलंगाना बीजेपी अध्यक्ष और लगाकतार तीन बार से विधायक रहें किशन रेड्डी को मैदान में उतारा है। किशन रेड़्डी सिंकदराबाद लोकसभा क्षेत्र में जमीनी स्तर पर दशकों से सक्रिय रहें हैं। इसी क्षेत्र की हिमायतनगर विधानसभा सीट की 2004 की जीत और अम्बरपेट विधानसभा सीट की 2009 से लगातार दो जीत इस बात की तस्दीक भी करती है। हलांकि किशन रेड़्डी विगत 2018 में अम्बरपेट विधानसभा सीट पर तीसरी जीत दर्ज नही करा सके। ये हार किशन रेड्डी के लिए भी अप्रत्यशित थी, क्योकि इनके विरोधी भी इनकी जीत को लेकर आश्वस्त थे। इस लोकसभा चुनाव में मोदी का साथ और पिछली हार की सहानुभूति किशन रेड्डी के काम जरुर आएगी। यहां हम आपको बता दें कि किशन रेड्डी प्रधानमंत्री मोदी के अच्छे मित्रों में शुमार होतें है, और मोदी कम से कम एक चुनावी रैली तो सिकंदराबाद में जरुर करेंगे, और उसका असर भी होगा। पिछले लोकसभा चुनावों में भी सिर्फ सिकंदराबाद सीट ऐसी थी जहां कुछ हद तक मोदी का जादू चला था।
Anjan Kumar Yadev (Congress)

सिकंदराबाद लोकसभा सीट पर कांग्रेस के उम्मीदवार है अंजन कुमार यादव, ये इसी लोकसभा सीट से दो बार सासंद रह चुके है। अंजन कुमार यादव सिंकदराबाद क्षेत्र के प्रभावशाली नेता माने जाते है। इस इलाके में यादव मतदाताओं की तादात ज्यादा होना भी पार्टी के भीतर इनकी दावेदारी को मजबूत करता है। चौदहवीं और पंद्रहवीं लोकसभा की लगातार जीत ने इनकी दावेदारी और इलाके में प्रभाव पर मुहर भी लगा दी। लेकिन 2014 में सोलहवीं लोकसभा के लिेए हुए चुनावों में ये बीजेपी के बंडारू दत्तात्रेय से शिकस्त खा बैठे।
Anil  Yadev, Youth Congress
 (Son og Anjan Kumar yadev)
अंजन कुमार यादव के बेटे अनिल कुमार यादव तेलंगाना यूथ कंग्रेस के अध्यक्ष है और क्षेत्र में युवाओं को प्रभावित करने का माद्दा रखते है, हंलाकि पिछले विधानसभा चुनावों में युवाओं का रुझान सीएम केसीआर के बेटे और युवा नेता के.टी. रामाराव (केटीआर) की तरफ तेजी से शिफ्ट हुआ है। विगत विधानसभा चुनावों में केटीआर ने विशेष तौर पर हैदराबाद में अपनी मेहनत से युवाओं को अपनी तरफ खींचा है। इसके बावजूद ये कहा जा सकता है कि नीजी तौर पर अंजन आज भी सिंकदराबाद के कद्दावर नेताओं में शुमार होते हैं।



Sai Kiran Yadev (TRS Candidate) 
आखिर में बात कर लेतें है, बिल्कुल नये, बिल्कुल युवा टीआरएस उम्मीदवार तलासनी सांई किरण यादव की। विधानसभा चुनावों में अपनी जीत से उत्साहित सत्ताधारी टीआरएस ने 32 साल के एक युवा चेहरे को मैदान में उतारा है। युवा तलासनी सांई किरण यादव पहली बार चुनावी राजनीति में कदम रख रहें है, हलांकि हैदराबाद के लोकल बॉडी (GHMC) और विधानसभा चुनावों में केटीआर की युवा फौज का हिस्सा रहें है। सांई सूबे के फिसरीज़ और सिनेमेटोग्राफी मंत्री और सनत नगर के विधायक तलासनी श्रीनिवास यादव के बेटे है। तलासनी सांई अपने पिता के चुनावी अभियान की भी जिम्मेदारियां सम्भाल चुके हैं, इस लिहाज से चुनावी राजनीति से नावाकिफ़ भी नहीं है।

एक तथ्य जो ध्यान देने लायक है और जूनियर तलासनी को मजबूत करता दिख रहा है, वो है, सिकंदराबाद के लोकल बॉ़डी में कांग्रेस और बीजेपी की गैर मौजूदगी। इस लोकसभा क्षेत्र में कुल 40 कॉरपोरेटर हैं, जिसमें से 31 टीआरएस के और 9 AIMIM के हैं। दावेदारी के तुरंत बाद मंत्री तलासनी यादव और जूनियर तलासनी सीधा AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी से मिलने पहुंचे।
Asaduddin Owasi, AIMIM (Left), Minister Talasani Srinivas Yadev (Center)
 & Sai Kiran (Right)
सदुद्दीन ओवैसी ने सिंकदराबाद से टीआरएस को सपोर्ट करने का ऐलान कर डाला, वैसे भी असदुद्दीन ओवैसी बीजेपी और कांग्रेस से इस सीट को छीनने की बात कर चुके है। ऐसी सूरतेहाल में सांई किरन की जीत का आधार मजबूत होता दिख रहा है। एक बात और जो काफी अहम है, वो ये कि सिंकदराबाद सीट पढ़े लिखे और जागरुक वोटरों के लिए जानी जाती है। और सांई किरण यादव इस पैमाने पर भी खरा उतरते हैं, सांई किरण यादव ने उच्च शिक्षा विदेशों में रह कर ली है, ठीक टीआरएस वर्किंग प्रेसिडेंट के. टी. रामाराव की तरह। हां, अंजन कुमार यादव की वज़ह से यादव वोटरों का विभाजन जरुर सांई किरण यादव को झेलना होगा।

इस पूरे विश्लेषण और तथ्यों के आलोक में ये आंदाजा लगाना मुश्किल नही कि टीआरएस, बीजेपी और कांग्रेस से ये सीट छीन सकती है। इस बात का अंदाजा टीआरएस उम्मीदवार तलासनी सांई किरण यादव को भी है। हमारे संस्थान (ANI) को दिये एक इंटव्यू में तलासनी सांई किरण यादव ने बड़े ही बेबाकी से इसे स्वीकार भी किया है।......
Talasni Sai Kiran Yadev with ANI 

ये जीत तो मुझे मेरे नेता केसीआर साहब और वर्किंग प्रेसिड़ेट की तरफ से थाली में सजा कर दी जा रहीं है, मुझे तो मेहनत सिर्फ जीत की मार्जिन के लिेए करना है।
                 --तलासनी सांई किरण यादव, टीआरएस उम्मीदवार, सिकंदराबाद लोकसभा क्षेत्र

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तेलंगाना: बीजेपी के कब्जे वाली इकलौती लोकसभा सीट भी जा सकती है हाथ से

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