
दिल्ली और उत्तरप्रदेश की जेलों की हालत पर क्या कहा जाए, आए दिन कुछ ना कुछ घटनाएं सुनने को मिल ही जाती हैं। गाजियाबाद के डासना जिला कारागार में शनिवार को कैदीयों ने घंटों जमकर उत्पात मचाया। स्थिति पर काबू करने के लिए पुलिस व जेल स्टाफ को कई राउंड गोलियां चलानी पड़ी और आंसू गैस के गोले भी दागने पड़े। इसमें एक दर्जन पुलिसवाले व जेलकर्मी तथा करीब अस्सी बंदी घायल भी हुए। जिलाधिकारी व पीएसी के पहुंचने के बाद ही जेल में पुलिस बल प्रवेश कर सका। अभी कुछ ही दिनों पहले मेरठ जेल का निरीक्षण करने पहुंचे डीआईजी (जेल) एमएल प्रकाश की टीम को कैदियों ने जमकर धुना था। इस मामले में जेल प्रशासन की मिलीभगत होने की आशंका जतायी गयी थी। जेल की छापामारी में मोबाइल फोन व अन्य आपत्तिजनक वस्तुएं मिली थी। इस मामले की जांच एसडीएम को सौंपी गयी । दरअसल कुछ दिनों पूर्व भी वरिष्ठ अफसरों ने शिकायतें मिलने पर मेरठ जेल में छापामारी की थी। उस समय भी छापामारी के दौरान जेल में मोबाइल फोन और सिम कार्ड मिले थे। अभी कुछ ही दिन पूर्व तिहाड़ जेल के 12 विचाराधीन कैदी उस समय फरार हो गए, जब उन्हें एक विशेष अदालत में पेश करने के लिए ले जाया जा रहा था। जेलों में इस तरह बढ़ रही घटनाओं को देखकर क्या ये नही लगता कि अब वो समय आ गया है कि इस पर कोई ठोस कदम उठाया जाए? जिससे इस तरह की घटनाओं पर नकेल कसी जा सके।