बेनज़ीर भुट्टो के काफ़िले पर हमला
पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो के स्वदेश लौटने के बाद कराची में उनके काफ़िले में दो बम धमाके हुए हैं जिनमें 125 लोग मारे गए हैं और लगभग 300 लोग घायल हुए हैं.धमाके स्थानीय समयानुसार मध्यरात्रि के बाद हुए जब आठ साल बाद पाकिस्तान लौटीं बेनज़ीर भुट्टो हज़ारों समर्थकों के काफ़िला के साथ कराची की सड़कों से होती हुई मोहम्मद अली जिन्ना की मज़ार की ओर जा रही थीं. ग़ौरतलब है कि ये हमले व्यापक सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद हुए. कुछ चरमपंथी गुटों ने बेनज़ीर भुट्टो के पाकिस्तान लौटने से पहले धमकियाँ जारी की थीं. अज़हर फ़ारुक़ी का कहना था दो धमाकों में से एक आत्मघाती हमला था. मृतकों में अनेक पुलिसकर्मी, एक स्थानीय टेलीविज़न चैनल के कैमरामैन और बेनज़ीर की पार्टी के कई कार्यकर्ता हैं. पाकिस्तान के गृहमंत्री के आफ़ताब शेरपाओ ने बीबीसी को बताया कि बेनज़ीर भुट्टो और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के दूसरे बड़े नेता सुरक्षित हैं.
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बीबीसी को बताया कि ये धमाके मध्यरात्रि के बाद हुआ. पहले एक धमाका हुआ जिसके बाद अफ़रातफ़री फैल गई लेकिन इससे पहले कि सुरक्षाकर्मी और मौजूद नेता स्थिति को संभाल पाते, दूसरा भीषण धमाका हुआ. दूसरा धमाका पहले की तुलना में ज़्यादा ज़बरदस्त था और ज़्यादा लोगों की जान दूसरे धमाके के कारण गई. धमाकों के कारण बेनज़ीर भुट्टो के वाहन की खिड़कियों के शीशे टूट गए.जब काफ़िला चला था तब बेनज़ीर ट्रक के ऊपर, अन्य नेताओं के साथ खड़ी, हाथ हिलाती नज़र आ रही थीं. लेकिन जब विस्फोट हुए तब बेनज़ीर भुट्टो वाहन के भीतर जा चुकी थीं और अंदर बैठी हुई थीं. बेनज़ीर भुट्टो को उनके निवास बिलावल हाउस पहुँचा दिया गया. उनकी ओर से कोई बयान जारी नहीं किया गया है. हमलों के बाद उनके घर की सुरक्षा और कड़ी कर दी गई है. हालांकि अधिकारियों के अनुसार बेनज़ीर भुट्टो को सुरक्षा कारणों के चलते सड़क की जगह हैलीकॉप्टर से यात्रा करने को कहा गया था पर उन्होंने रैली के साथ सड़क से जाना ही तय किया.धमाकों के बाद पूरे कराची को 'सील' कर दिया गया है, 'हाई अलर्ट' घोषित कर दिया गया और सभी संभावित कार्यक्रम रद्द कर दिए गए हैं.कराची के पुलिस प्रमुख अज़हर फ़ारुक़ी से यह पूछने पर कि सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम के बावजूद हमला कैसे हुआ, उनका कहना था कि जब इतनी भीड़ हो तो आत्मघाती हमला हो सकता है.उनका कहना था, "सुरक्षा के लिए इंतज़ाम तो किए जा सकते हैं पर आत्मघाती हमलावरों को रोक पाना पूरी तरह से संभव नहीं होता है. हज़ारों-लाखों लोग हों तो यह तय करना मुश्किल होता है कि कौन लोग काफ़िले में शामिल लोग हैं और कौन नहीं."उन्होंने कहा, "जब काफ़िला 14-16 किलोमीटर चल चुका हो तो जैमर की बैटरी भी काम करना बंद कर देती है और यदि हमला रिमोट से न किया गया हो तो उसे जैमर से रोकना संभव ही नहीं होता."जहाँ गुरुवार को धमाकों के पहले तक कराची में जश्न का माहौल बना हुआ था वहीं अब मातम और शोक की छाया है. प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि घटनास्थल पर चारों तरफ़ लाशें बिखरी पड़ी थीं और जहाँ-तहाँ ख़ून बिखरा हुआ था. घायलों को कई अस्पतालों में पहुँचाया गया. इनमें से अनेक लोगों की हालत नाज़ुक बताई जा रही है. उल्लेखनीय है कि बेनज़ीर भुट्टो दोपहर को दुबई से पाकिस्तान पहुँचीं और उनके स्वागत की रैली एयरपोर्ट से शहर की ओर निकली थी. इस रैली में बेनज़ीर भुट्टो के दसियों हज़ार समर्थक थे. धमाकों के बाद काफ़िले को रोक दिया गया और आसपास के इलाक़े की घेरेबंदी कर दी गई. वहाँ बम निरोधक दस्ते भी भेजे गए. तालेबान समर्थक चरमपंथियों ने पहले ही हमलों की धमकी दी थी और इसके मद्देनज़र कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी. प्रशासन ने 'फ़ूलप्रूफ़' सुरक्षा व्यवस्था का दावा किया था.
पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो के स्वदेश लौटने के बाद कराची में उनके काफ़िले में दो बम धमाके हुए हैं जिनमें 125 लोग मारे गए हैं और लगभग 300 लोग घायल हुए हैं.धमाके स्थानीय समयानुसार मध्यरात्रि के बाद हुए जब आठ साल बाद पाकिस्तान लौटीं बेनज़ीर भुट्टो हज़ारों समर्थकों के काफ़िला के साथ कराची की सड़कों से होती हुई मोहम्मद अली जिन्ना की मज़ार की ओर जा रही थीं. ग़ौरतलब है कि ये हमले व्यापक सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद हुए. कुछ चरमपंथी गुटों ने बेनज़ीर भुट्टो के पाकिस्तान लौटने से पहले धमकियाँ जारी की थीं. अज़हर फ़ारुक़ी का कहना था दो धमाकों में से एक आत्मघाती हमला था. मृतकों में अनेक पुलिसकर्मी, एक स्थानीय टेलीविज़न चैनल के कैमरामैन और बेनज़ीर की पार्टी के कई कार्यकर्ता हैं. पाकिस्तान के गृहमंत्री के आफ़ताब शेरपाओ ने बीबीसी को बताया कि बेनज़ीर भुट्टो और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के दूसरे बड़े नेता सुरक्षित हैं.
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बीबीसी को बताया कि ये धमाके मध्यरात्रि के बाद हुआ. पहले एक धमाका हुआ जिसके बाद अफ़रातफ़री फैल गई लेकिन इससे पहले कि सुरक्षाकर्मी और मौजूद नेता स्थिति को संभाल पाते, दूसरा भीषण धमाका हुआ. दूसरा धमाका पहले की तुलना में ज़्यादा ज़बरदस्त था और ज़्यादा लोगों की जान दूसरे धमाके के कारण गई. धमाकों के कारण बेनज़ीर भुट्टो के वाहन की खिड़कियों के शीशे टूट गए.जब काफ़िला चला था तब बेनज़ीर ट्रक के ऊपर, अन्य नेताओं के साथ खड़ी, हाथ हिलाती नज़र आ रही थीं. लेकिन जब विस्फोट हुए तब बेनज़ीर भुट्टो वाहन के भीतर जा चुकी थीं और अंदर बैठी हुई थीं. बेनज़ीर भुट्टो को उनके निवास बिलावल हाउस पहुँचा दिया गया. उनकी ओर से कोई बयान जारी नहीं किया गया है. हमलों के बाद उनके घर की सुरक्षा और कड़ी कर दी गई है. हालांकि अधिकारियों के अनुसार बेनज़ीर भुट्टो को सुरक्षा कारणों के चलते सड़क की जगह हैलीकॉप्टर से यात्रा करने को कहा गया था पर उन्होंने रैली के साथ सड़क से जाना ही तय किया.धमाकों के बाद पूरे कराची को 'सील' कर दिया गया है, 'हाई अलर्ट' घोषित कर दिया गया और सभी संभावित कार्यक्रम रद्द कर दिए गए हैं.कराची के पुलिस प्रमुख अज़हर फ़ारुक़ी से यह पूछने पर कि सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम के बावजूद हमला कैसे हुआ, उनका कहना था कि जब इतनी भीड़ हो तो आत्मघाती हमला हो सकता है.उनका कहना था, "सुरक्षा के लिए इंतज़ाम तो किए जा सकते हैं पर आत्मघाती हमलावरों को रोक पाना पूरी तरह से संभव नहीं होता है. हज़ारों-लाखों लोग हों तो यह तय करना मुश्किल होता है कि कौन लोग काफ़िले में शामिल लोग हैं और कौन नहीं."उन्होंने कहा, "जब काफ़िला 14-16 किलोमीटर चल चुका हो तो जैमर की बैटरी भी काम करना बंद कर देती है और यदि हमला रिमोट से न किया गया हो तो उसे जैमर से रोकना संभव ही नहीं होता."जहाँ गुरुवार को धमाकों के पहले तक कराची में जश्न का माहौल बना हुआ था वहीं अब मातम और शोक की छाया है. प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि घटनास्थल पर चारों तरफ़ लाशें बिखरी पड़ी थीं और जहाँ-तहाँ ख़ून बिखरा हुआ था. घायलों को कई अस्पतालों में पहुँचाया गया. इनमें से अनेक लोगों की हालत नाज़ुक बताई जा रही है. उल्लेखनीय है कि बेनज़ीर भुट्टो दोपहर को दुबई से पाकिस्तान पहुँचीं और उनके स्वागत की रैली एयरपोर्ट से शहर की ओर निकली थी. इस रैली में बेनज़ीर भुट्टो के दसियों हज़ार समर्थक थे. धमाकों के बाद काफ़िले को रोक दिया गया और आसपास के इलाक़े की घेरेबंदी कर दी गई. वहाँ बम निरोधक दस्ते भी भेजे गए. तालेबान समर्थक चरमपंथियों ने पहले ही हमलों की धमकी दी थी और इसके मद्देनज़र कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी. प्रशासन ने 'फ़ूलप्रूफ़' सुरक्षा व्यवस्था का दावा किया था.

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