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Hyderabad, Telangana, India

Tuesday, March 12, 2019

तेलंगाना MLC चुनाव: कांग्रेस कुनबे में हुई सेंधमारी, चुनाव का किया बहिष्कार, सत्तापक्ष की जीत तय


तेंलागना विधानसभा चुनावों के बाद, और लोकसभा चुनावों के ठीक पहले विधान परिषद की 5 सीटों के लिए होने वाला ये चुनाव कई मायनों में महत्वपूर्व है। महत्वपूर्ण इसलिए भी कि लोकसभा चुनावों से पहले टीआरएस के शक्ति परिक्षण के लिए ये अंतिम मौका है। लेकिन मतदान और परिणामों से पहले ही टीआरएस ने रणनीतिक सूझबूझ से अपनी जीत सुनिश्चित कर ली है। विधानसभा चुनावों से पहले बनी महाकुटुमी अपने छोटे से कुनबे को भी नही सहेज पायी। चार कांग्रेसी विधायक और एक टीडीपी विधायक सत्तारूढ़ टीआरएस में शामिल हो गये। इस शिकायत को लेकर कांग्रेस नेताओं ने राज्यपाल और चुनाव आयोग तक का दरवाजा खटखटाया है। कांग्रेस का आरोप है कि तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव उनके विधायकों को प्रलोभन देकर लगातार टीआरएस में शामिल कर रहें है। तेलंगाना कांग्रेस अध्यक्ष उत्तम कुमार रेड्डी ने सत्तारूढ़ टीआरएस पर संविधान का उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए चुनावों का बहिष्कार करने का ऐलान कर दिया है।


विधान परिषद के इन चुनावों में टीआरएस ने 4 उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है। इन चार उम्मीदवारों में मंत्री मोहम्मद महमूद अली, एस सुभाष रेड्डी, सत्यवती राठौड़ और येग्गी मल्लेशम शामिल है। जबकि एक सीट गठबंधन सहयोगी एआईएमआईएम के लिए छोड़ दी है। एआईएमआईएम के सुप्रीमों असदुद्दीन ओवैसी ने मिर्जा रियाज उल हसन अफंदी को उम्मीदवार बनाया है। जबकि मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने जी नारायण रेड्डी को अपना उम्मीदवार घोषित किया था।



120 सदस्यों वाली तेलंगाना विधानसभा में टीआरएस के 88 विधायक है। जबकि एक निर्दलीय विधायक और एक एआईएफबी के विधायक ने टीआरएस को समर्थन देने की घोषणा कर दी है। इसके चलते टीआरएस के सदस्यों की संख्य बढ़कर 90 हो गई है। सदन में एआईएमआईएम के सात विधायक है। बीजेपी का सदन में मात्र एक ही सदस्य है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के 19 विधायक है। मगर को इनके चार विधायक रेगा कांताराव, अतरम सक्कू, और चिरूमर्ती लिंगय्या, हरि प्रिया नायक हाल ही में टीआरएस में शामिल हे चुके है। वहीं टीडीपी के इकलौते विधायक एस. वेंकट विरैया भी टीआरएस में शामिल हो चुके हैं। ऐसी सियासी सूरतेहाल में कांग्रेस को उम्मीद की कोई किरण दिखती नज़र नही आ रही। लिहाजा चुनावों से दूर रहने का फैसला कर लिया है। चुनाव परिणामों से पहले ही परिणाम साफ है....टीआरएस 4 सीटों पर और एआईएमआईएम एक।

Tuesday, July 17, 2018

आखिरकार मिला शरत कोप्पू को न्याय, आरोपी को कंसास पुलिस ने एनकाउंटर में किया ढेर

अमेरिका के कंसास में भारतीय मूल के इंजीनियर शरत कोप्पू की गोली मारकर हत्या करनेवाले संदिग्ध आरोपी को कंसास पुलिस ने एक एनकाउंटर में मार गिराया। कंसास पुलिस के साथ हुई इस गोलीबारी में तीन पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं।

6 जुलाई को हैदराबाद के रहने वाले 25 वर्षीय शरद कोप्पू को लूटपाट के दौरान गोली मार दी गई थी, जिससे उनकी मौत हो गई थी। शरत को पीठ पर गोली मारी गयी थी और अस्पताल ले जाने के दौरान शरत ने दम तोड़ दिया। शरत भारत में वह सॉफ्टवेयर इंजीनियर की पढाई करने के बाद अमेरिका में मास्टर्स की पढ़ाई करने गया था और एक रेस्तरां में पार्ट टाईम काम करता था।


आज जब दो अंडरकवर पुलिसवाले जब संदिग्ध से बात करने की कोशिश की तो वो पुलिस पर गोलियां चलाने लगा, उसकी तरफ से पुलिस पर कई राउंड फायरिंग की गई। इसीदौरान एनकाउंटर में संदिग्‍ध व्‍यक्ति मारा गया।


इस घटना की जानकारी के बाद शरत के चाचा प्रसाद कोप्पू ने फोन पर कहा कि "हालांकि यह एक ख़ुशी खबर है कि उसे सजा मिल गयी, लेकिन उसे पकड़ा जाना चाहिए और एक निर्दोष मारे जाने के लिए दर्द का एहसास करने के लिए सजा दी जानी चाहिए।"

Sunday, January 5, 2014

आखिरकार “खालिश सियासी शख्स” बन गये मनमोहन

नौकराशाह, अर्थशास्त्री और भारत के प्रधानमंत्री जैसे ओहदो पर रहने के बावजूद यूपीए सरकार के मुखिया मनमोहन सिंह की “खालिश सियासी शख्स” की छवि नही बन पाई....विपक्ष और सत्ता के गलियारों को तो छोड़ दीजिए गली मुहल्लों चौक चौराहों पर होने वाली आम आदमी की चर्चा, बहस और मुबाहिसो में भी मनमोहन सिंह एक “विशेष छवि” से बाहर नही निकल पाये। लेकिन 10 साल तक हिन्दुस्तान की सत्ता पर काबिज रहने के बावजूद “खालिश सियासी शख्स” की छवि नही बन पाई उनकी। लेकिन कल अपनी प्रेस कांफ्रेन्स में मनमोहन सिंह ने नरेन्द्र मोदी पर जिस तरीके से निशाना साधा वो चौकाने वाला था। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को ऐसे तेवर में कभी कोई नही सुना था। मनमोहन सिंह ने कहा कि अगर मोदी पीएम बनते है तो तो वो देश के लिए विनाशकारी होगा। इस मौके पर मुझे मुनव्वर राणा साहब का एक शेर याद आया.........

सियासी आदमी की शक्ल तो प्यारी निकलती है,
मगर जब मुंह खोलता है तो चिंगारी निकलती है।


आज मै कह सकता हूं.....अपने रिटायरमेंट से पहले मनमोहन सिंह “खालिश सियासी शख्स” हो गये है।

तेलंगाना: बीजेपी के कब्जे वाली इकलौती लोकसभा सीट भी जा सकती है हाथ से

BJP MP Bandaru Dattatreya आंध्रप्रदेश से अलग होने के बाद वर्तमान में तेलंगाना के पास लोकसभा की 17 और विधान सभा की 119 सीटें रह गयी ह...