इंडियन डिप्लोमैट देवयानी खोबरागडे की
गिरफ्तारी और कपड़े उतारकर तलाशी लेने के मसले पर अपने विदेश मंत्री ने बड़ा ही
डिप्लोमेटिक रुख अख्तियार किया.....एक तो लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार के विरोध
स्वरुप यूएस कांग्रेस के प्रतिनिधियों से मिलने के इंकार के बाद खुद मिलने चले गये
और दूसरी तरफ इस घटना को देश का अपमान करार दिया। अरे भाई इतना ही अपमानित हो तो
मुलाकात की क्या जरुरत थी। आप भी विरोध स्वरुप मुलाकात नही करते। ऐसी अपमान की
घटनाओं से भारत के कई आम और खास दो चार हो चुके है.....लेकिन सरकार रस्म अदायगी के
सिवा कुछ नही करती। ये घटना अपने आप में बेहद शर्मनाक है क्योंकि इससे पहले इस तरह
की जो भी घटनाएं होती थी तो वो सुरक्षा के नाम पर एयपोर्ट पर होती थी। लेकिन एक
आर्थिक अपराध की आरोपी महिला राजनयिक के साथ ये कैसा सलूक ?....आखिर
कपड़ा किस बात पर उतरवा कर तलाशी ली गयी ? हैरत करने वाली पहली बात ये की एक महिला
के साथ ऐसा सलूक किया गया....दूसरी ये कि एक देश के राजनयिक के साथ ऐसा किया गया
जिसे कुछ खास विशेषाधिकार प्राप्त होते है। कायदन तो राजनयिक की गिरफ्तारी ही नही
होनी चाहिए थी....भारतीय दूतावास और भारत सरकार को भरोसे में लेकर कोई कार्रवाही
की जानी चाहिए थी....लेकिन अमरीकी पुलिस ने ऐसा कत्तई नही किया....दूसरी धृष्टता
ये कि उस महिला राजनयिक को हथकड़ी पहनाई गयी और तीसरी और सबसे शर्मनाक ये कि उनके
कपड़े उतरवा कर तलाशी ली गयी। खुद को सभ्य कहने वाला अमरीकी समाज जहां महिला
अधिकारों और मानवीय अधिकारों को लेकर लोग सचेत रहते है और थोड़ी थोड़ी ज्यादतियों
पर आंदोलन पर उतारु हो जाते है वो आखिर खामोश क्यूं है। ताज्जुब की बात ये कि
मामले की शुरुआत ही घरेलू नौकर के अधिकारों के हनन को लेकर थी....उस जांच में
अमरिकी पुलिस ने एक महिला और सम्मनित देश की एक राजनयिक के ही अधिकारों और सम्मान
का हनन कर दिया।.........एक भारतीय के अंदर इसे लेकर गुस्सा तो जरुर है लेकिन इस
सरकार का क्या करें जिसमें ऐसे मोर्चो पर रीढ़ की हड्डी ही नही दिखती।
आज 16 दिसम्बर-
दिल्ली गैंगरेप की बरसी थी, हमारे सक्षम मंत्रियो और नेताओं ने महिला
अधिकारों और महिला सुरक्षा को लेकर लम्बी लम्बी झोड़ी...... देवयानी खोबरागडे के
मसले पर डिप्लोमैटिक रुख अख्तियार करने वाले विदेश मंत्री सलमान खुर्शिद ने तो
दामिनी पर एक नज्म भी लिख डाली है। लेकिन उनकी असल ड्यूटी पर उन्होने हिलाहवाली कर
डाली........ये मामला महज डिप्लोमेसी का नही देश की इज्जत से भी जुड़ा है। देवयानी
खोबरागडे के प्रति सलमान खुर्शिद साहब की जिम्मेदारी ज्यादा बनती है क्योंकि वो
विदेश में भारतीय दूतावास की एक अधिकारी है। एक बेटी के साथ ऐसा सलूक होने पर एक
पिता का जो रुख होता है वो रुख अख्तियार करना चाहिए था सलमान खुर्शिद साहब को
लेकिन उन्होने ऐसा नही किया।



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