भारतीय राजनयिक
देवयानी खोब्रागड़े के साथ अमेरिका में हुए दुर्व्यवहार के कई दिन बीत चुके है। आखिरकार देश की हूकूमत ने हल्के और
सस्ते अंदाज में ही सही कड़ी प्रतिक्रिया दी। लेकिन ताज्जुब की बात ये कि बात बात
पर महिला मुद्दों को लेकर सड़को पर उतरने वाली तथाकथिक महिलावादी और उनके संगठन
कहां है ? क्या
वातानुकलित दफ्तर और चैनलों में बैठ कर तीखी बहस से उनको फुर्सत नही ? ऐसे
तो हर रोज जस्टिस गांगुली को लेकर सड़को पर दिख जाती है।
कल सोफिया हयात के मसले
पर भी अरमान कोहली के खिलाफ प्रदर्शन देखने को मिले। पिछले दिनों तरुण तेजपाल को
लेकर भी सड़कों पर ऐसी महिलावादी संगठनों का प्रदर्शन देखने को मिला। लेकिन देवयानी
खोब्रागड़े के साथ अमेरिका में हुए दुर्व्यवहार पर यूएस एम्बेसी तो क्या देश के
किसी हिस्सें में कोई खास विरोध प्रदर्शन देखने को नही मिला। मुझे माफ
करियेगा....भारत में ऐसे कई महिलावादी एनजीओं (संगठन) है जिनकी अर्थव्यवस्था की
नीव अमरीका में ही कही दिखती नजर आती है और इनके कर्ताधर्ता और संचालकों का वहां
आना जाना होता है।.....इस बात का जिक्र करने का मेरा मकसद महज इतना है कि अमरीका
में भी जाकर विरोध प्रदर्शन कर सकते है ये संगठन ( अभी तक किया नही है।) ।



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