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Tuesday, July 17, 2018

आखिरकार मिला शरत कोप्पू को न्याय, आरोपी को कंसास पुलिस ने एनकाउंटर में किया ढेर

अमेरिका के कंसास में भारतीय मूल के इंजीनियर शरत कोप्पू की गोली मारकर हत्या करनेवाले संदिग्ध आरोपी को कंसास पुलिस ने एक एनकाउंटर में मार गिराया। कंसास पुलिस के साथ हुई इस गोलीबारी में तीन पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं।

6 जुलाई को हैदराबाद के रहने वाले 25 वर्षीय शरद कोप्पू को लूटपाट के दौरान गोली मार दी गई थी, जिससे उनकी मौत हो गई थी। शरत को पीठ पर गोली मारी गयी थी और अस्पताल ले जाने के दौरान शरत ने दम तोड़ दिया। शरत भारत में वह सॉफ्टवेयर इंजीनियर की पढाई करने के बाद अमेरिका में मास्टर्स की पढ़ाई करने गया था और एक रेस्तरां में पार्ट टाईम काम करता था।


आज जब दो अंडरकवर पुलिसवाले जब संदिग्ध से बात करने की कोशिश की तो वो पुलिस पर गोलियां चलाने लगा, उसकी तरफ से पुलिस पर कई राउंड फायरिंग की गई। इसीदौरान एनकाउंटर में संदिग्‍ध व्‍यक्ति मारा गया।


इस घटना की जानकारी के बाद शरत के चाचा प्रसाद कोप्पू ने फोन पर कहा कि "हालांकि यह एक ख़ुशी खबर है कि उसे सजा मिल गयी, लेकिन उसे पकड़ा जाना चाहिए और एक निर्दोष मारे जाने के लिए दर्द का एहसास करने के लिए सजा दी जानी चाहिए।"

Sunday, January 5, 2014

आखिरकार “खालिश सियासी शख्स” बन गये मनमोहन

नौकराशाह, अर्थशास्त्री और भारत के प्रधानमंत्री जैसे ओहदो पर रहने के बावजूद यूपीए सरकार के मुखिया मनमोहन सिंह की “खालिश सियासी शख्स” की छवि नही बन पाई....विपक्ष और सत्ता के गलियारों को तो छोड़ दीजिए गली मुहल्लों चौक चौराहों पर होने वाली आम आदमी की चर्चा, बहस और मुबाहिसो में भी मनमोहन सिंह एक “विशेष छवि” से बाहर नही निकल पाये। लेकिन 10 साल तक हिन्दुस्तान की सत्ता पर काबिज रहने के बावजूद “खालिश सियासी शख्स” की छवि नही बन पाई उनकी। लेकिन कल अपनी प्रेस कांफ्रेन्स में मनमोहन सिंह ने नरेन्द्र मोदी पर जिस तरीके से निशाना साधा वो चौकाने वाला था। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को ऐसे तेवर में कभी कोई नही सुना था। मनमोहन सिंह ने कहा कि अगर मोदी पीएम बनते है तो तो वो देश के लिए विनाशकारी होगा। इस मौके पर मुझे मुनव्वर राणा साहब का एक शेर याद आया.........

सियासी आदमी की शक्ल तो प्यारी निकलती है,
मगर जब मुंह खोलता है तो चिंगारी निकलती है।


आज मै कह सकता हूं.....अपने रिटायरमेंट से पहले मनमोहन सिंह “खालिश सियासी शख्स” हो गये है।

Wednesday, December 18, 2013

देवयानी खोब्रागड़े मामला - कहां है महिलावादी संगठन ?

भारतीय राजनयिक देवयानी खोब्रागड़े के साथ अमेरिका में हुए दुर्व्यवहार के कई दिन बीत चुके है। आखिरकार देश की हूकूमत ने हल्के और सस्ते अंदाज में ही सही कड़ी प्रतिक्रिया दी। लेकिन ताज्जुब की बात ये कि बात बात पर महिला मुद्दों को लेकर सड़को पर उतरने वाली तथाकथिक महिलावादी और उनके संगठन कहां है ? क्या वातानुकलित दफ्तर और चैनलों में बैठ कर तीखी बहस से उनको फुर्सत नही ? ऐसे तो हर रोज जस्टिस गांगुली को लेकर सड़को पर दिख जाती है। 

कल सोफिया हयात के मसले पर भी अरमान कोहली के खिलाफ प्रदर्शन देखने को मिले। पिछले दिनों तरुण तेजपाल को लेकर भी सड़कों पर ऐसी महिलावादी संगठनों का प्रदर्शन देखने को मिला। लेकिन देवयानी खोब्रागड़े के साथ अमेरिका में हुए दुर्व्यवहार पर यूएस एम्बेसी तो क्या देश के किसी हिस्सें में कोई खास विरोध प्रदर्शन देखने को नही मिला। मुझे माफ करियेगा....भारत में ऐसे कई महिलावादी एनजीओं (संगठन) है जिनकी अर्थव्यवस्था की नीव अमरीका में ही कही दिखती नजर आती है और इनके कर्ताधर्ता और संचालकों का वहां आना जाना होता है।.....इस बात का जिक्र करने का मेरा मकसद महज इतना है कि अमरीका में भी जाकर विरोध प्रदर्शन कर सकते है ये संगठन ( अभी तक किया नही है।) । 
लगता है इन संगठनों को इस मसले में टीआरपी नही दिखती। कम से कम विदेश मंत्रालय पर विरोध प्रदर्शन किया होता। महिला बिल को लेकर तो संसद के सामने जहां किसी को फटकने तक नही दिया जाता वहां तक पहुच गये थे महिलावादी संगठन। कम से कम विदेश मंत्री का तो घेराव कर दिया होता। यू एस एम्बेसी के बाहर ही नारे लगा दिये होते।

तेलंगाना: बीजेपी के कब्जे वाली इकलौती लोकसभा सीट भी जा सकती है हाथ से

BJP MP Bandaru Dattatreya आंध्रप्रदेश से अलग होने के बाद वर्तमान में तेलंगाना के पास लोकसभा की 17 और विधान सभा की 119 सीटें रह गयी ह...