
विश्व समुदाय के सामने भले ही पाकिस्तान कुछ भी कहे लेकिन आज भी वहां का समाज और निज़ाम दोनों कठमुल्लों के आगे बेबस हैं। अभी हाल ही में पाकिस्तान के एक विवादित इस्लामी अदालत यानी शरिया अदालत ने देश की पर्यटन मंत्री नीलोफ़र बख़्तियार के ख़िलाफ़ फ़तवा जारी किया है। अदालत ने अख़बार में छपी एक तस्वीर पर आपत्ति जताई है और कहा है कि उन्होंने अश्लील तरीके से तस्वीर खिंचवाई है। दरअसल नीलोफ़र बख़्तियार पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के भूकंप प्रभावितों के लिए धनराशि जुटाने के लिए फ़्रांस गई थीं और पैराग्लाइडिंग कर रही थीं। पाकिस्तानी अख़बारों में उनकी एक तस्वीर छपी है जिसमें वे कथित रुप से एक पुरुष को गले लगा रही हैं। इस्लामाबाद की लाल मस्जिद के मौलवी अब्दुल अज़ीज़ ने ये बेहुदा माँग की है कि नीलोफ़र बख़्तियार को उनके पद से हटा दिया जाए। अब्दुल अज़ीज़ के हिसाब से नीलोफ़र बख़्यितार ने जो किया वो ग़ैर-इस्लामी था, उन्होंने इस्लाम के नाम को ख़राब किया है और सज़ा मिलनी चाहिए। गौरतलब है कि मौलवी अब्दुल अज़ीज़ की अगुआई में ही कई मौलवियों ने पिछले हफ़्ते तालेबान की तर्ज पर इस्लामिक कोर्ट शुरु करने की घोषणा की थी। इन लोगों ने घोषणा की थी कि अगर उनके समर्थकों के ख़िलाफ़ क़दम उठाए थे तो वो आत्मघाती हमले करेंगे। फ़रवरी में पाकिस्तानी पंजाब की समाज कल्याण मंत्री ज़िल्ले हुमा की एक बंदूकधारी ने गोली मार कर हत्या कर दी थी। पुलिस के मुताबिक, जाँच के दौरान हमलावर ने कहा था कि उच्च पदों पर महिलाओं का आना ख़ुदा के नियमों के ख़िलाफ़ है और पुरुषों को नीचा दिखाने का एक प्रयास है। ज़िल्ले हुमा सत्तारूढ़ पाकिस्तान मुस्लिम लीग की एक सक्रिय सदस्या थीं और उनकी हत्या उस समय की गई जब वह एक राजनीतिक सभा को संबोधित करने जा रही थीं। पाकिस्तान का तलीबानी रुप सतही तौर पर भले ही भले ही न दिखे लेकिन अन्दर से पूरा पाकिस्तानी समाज़ और प्रशासन तलीबानी जंज़ीरों से जकड़ा हुआ है।

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