About Me

My photo
Hyderabad, Telangana, India

Monday, April 9, 2007

"मीडिया का “बेगार”




पत्रकारिता में भी बेगार होता है। चौकिये नहीं अगर आप मीडियाकर्मी है और किसी न्यूज चैनल या अख़बार में काम करतें हैं, तो वो आपको अच्छी तरह से मालूम होगा। अगर नहीं जानते हैं, तो आपका मीडिया में होना बेकार है। यही नहीं, बहुत संभावना है कि आपने भी शुरुआती दिनों में ये बेगारी की हो। मीडिया जगत में बेगार करनेवाले इन्टर्न के नाम से जाना जाता है। इस प्राणी की स्थिति अत्यन्त ही दयनीय होती है। ये सीखने की ललक और नौकरी की चाह के चक्कर में हाड़ -तोड़ मेहनत करते है, कुछ इन्टर्न तो ऐसे होते है कि मेहनत और प्रतिभा में अच्छे-अच्छों को मात देदें लेकिन वो होते तो हैं इन्टर्न ही, जो संस्थान द्वारा अपने कर्मचारियों को वर्क लोड़ कम करने के लिए उपलब्ध कराये जाते हैं। कुछ संस्थाएं तो ऐसी हैं जो 70 फीसदी इन्ही इन्टर्नस के बूते चलती हैं, अगर आप को यकीन नही हो रहा है तो जरुर आप देश के टाँप 4 चैनलों में से किसी में काम करते है। क्योंकि अभी इस जगहों पर ऐसी नौबत नही आयी है।

अभी कुछ दिनों पहले ही मेरे एक जूनियर का फोन आया, बातो से वो काफी निराश और हताश लग रहा था। मैने उसे कुरेदा तो उसका दर्द छलककर पीपल के दूध की तरह रिसने लगा। उसने उदास आवाज़ में ज़वाब दिया सर इन्टर्न करते करते मुझे एक साल हो गये है लेकिन यहां नौकरी का कोई चांस नजर नही आ रहा है। मैने इस लालच में यहां हाड़ तोड़ मेहनत की कि मुझे यहां नौकरी मिल जायेगी। मेरे साथ वालों को तो छोड़िये, मुझसे 6 महिने बाद वालों तक को नौकरी मिल गयी। जरा राहुल सर से मेरे लिए एक बार बात करिये ना। मुझे याद है एक साल पहले यही आभिषेक अपना फाइनल पेपर देने के बाद मुझसे मिलने डी.डी.न्यूज आया था। मै उसे अन्दर नही बुला सकता था, उस वक्त मेरी औकात किसी विजिटर को एंट्री दिलाने की नही थी लिहाजा मै ख़ुद बाहर गेट पर मिलने गया। उसने मुझसे इन्टर्नशीप का अनुरोध किया था, मैने वही से अपने मित्र राहुल को फोन लगाया, जो की एक नेशनल चैनल में बड़े ही जुगाड़ के बाद घुसा था और डेस्क बाबाओ की चौकड़ी में शामिल हो गया था। राहुल ने अभिषेक को दस दिन दौड़ाया और फिर तरस खा कर अपने यहां इन्टर्न रखवा लिया। उसके बाद अभिषेक का फोन बीच बीच में आता रहा इन्टर्नशीप बढ़वाने के लिए, हर बार मैने राहुल फैक्टर का ही इस्तेमाल किया। लेकिन अबकी अभिषेक की मदद में मै लाचार था,क्योंकि मै अपनी और राहुल की हैसियत से अच्छी तरह वाकिफ़ हूं। फिर भी मैने उसकी तसल्ली के लिए राहुल को फोन किया। राहुल का एक ही जवाब था दोस्त, लड़का मेहनत तो करता है लेकिन यहां साले लड़कियों और पौवे वालों को ही नौकरी देते है, तुमको तो सब कुछ पता ही है, तुम ही बताओ मै क्या करुं ? इतना ही होता तो मै तुम्हे यहां ना बुला लेता। मै झेपते हुए धीमी आवाज में ठीक है कह कर फोन रख दिया।


आज का मीडिया जहां समाजिक चेतना के नाम पर लोगों के घरों में घुस कर पारिवारिक विवादों को सड़कों पर घसीटने से भी परहेज नही कर रहा, वही इनकी संस्थाओं में घोर शोषण और भ्रष्टाचार व्याप्त है। मीडियाकर्मी मेरी बात ज्यादा अच्छी तरह सामझ सकते हैं क्योंकि वे इस माहौल से भली भांति परिचित होंगे। मैने लिखा भी इसी उद्देश्य से है कि इस विसंगति पर मीडिया तुर्कों की नज़र जाये। मैने सिर्फ सुना है देखा नही है कि एक जमाना था जब पेड इन्टर्न रखे जाते थे लेकिन आज आलम ये है कि दूरदर्शन जो खुद जनता के पैसे से चलाया जाता है वहां इन्टर्नशीप के लिए दो हजार रुपये लिए जा रहे हैं। हो सकता है कि वो दिन भी जल्द आ जाए कि निजी चैनल्स और अख़बार भी इस बात के पैसे वसूलने लगें। भविष्य में उनकी कमाई का ये अच्छा जरिया हो सकता है। कमाई के मद्देनज़र कुछ चैनल्स तो बकायदे अपना मीडिया स्कूल खोल रखा है, इससे उनकी अच्छी खासी उगाही भी हो रही है, जिससे वे अपने व्यवसायिक घाटे को पाट सकते है। अरस्तु ने एक बार कहा था कि राजनीति पूंजीपतियों की रखैल है। मै आज के मीडिया हाउस के मालिकों और पत्रकारों के सम्बन्ध की तुलना अरस्तु की उस उक्ति से करने की गुस्ताखी नही करुंगा। लेकिन अपने वरिष्ठो से इस पर चिंतन करने का अनुरोध जरुर करुंगा। हालांकि आज मीडिया में सभी, चाहें कितनी ही उँचीं पोस्ट पर ही क्यों न हो, अपनी ही समस्याओं से दिन रात जूझते रहते हैं । ऐसे में बेचारे दबे कुचले इन्टर्नो की फिक्र करने वाला है ही कौन?


3 comments:

  1. प्रमोद जी,
    आपने जो यह मुद्दा उछाला है। अरसे से इसकी जरुरत थी। आपने जो भी बातें लिखीं हैं, बो अक्षरसः सच हैं। मैने भी वो दौर देखा है। इस मुद्दे को उठाने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यबाद। आज के सारे इन्टर्नस आपके शुक्रगुजार होंगे।

    प्रदीप राय

    ReplyDelete
  2. Thanks! Pramod.
    you have raised untouched issue that are happening in reputed chamnnel. This is the truth of media, especially for electronic media. There are many people victim.

    ReplyDelete
  3. ये तो आग का दरिया है तैर के जाना ही पड़ेगा।

    ReplyDelete

तेलंगाना: बीजेपी के कब्जे वाली इकलौती लोकसभा सीट भी जा सकती है हाथ से

BJP MP Bandaru Dattatreya आंध्रप्रदेश से अलग होने के बाद वर्तमान में तेलंगाना के पास लोकसभा की 17 और विधान सभा की 119 सीटें रह गयी ह...